मनीषा की चूत फतह की

Antarvasna, sex stories in hindi: दीपक को मैंने घर बुला लिया था दीपक की तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए मैंने उसे घर आने के लिए कहा वह उस दिन घर आ गया था। मेरा छोटा भाई जो की दिल्ली में नौकरी करता था उसकी तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए मैंने उसे कहा कि तुम घर आ जाओ और फिर वह दिल्ली लौट आया था। जब वह दिल्ली लौटा तो उसकी तबीयत काफी ज्यादा खराब थी इसलिए हमे उसे हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ा। कुछ दिनों तक वह हॉस्पिटल में डॉक्टरों की देख रेख में रहा उसके बाद हम लोग उसे घर ले आए थे। जब वह घर आया तो उसके बाद मुझे इस बात की खुशी थी कि वह अब ठीक हो चुका है काफी दिनो तक उसकी तबीयत खराब रहने के बाद वह अब ठीक था। मैंने दीपक से कहा कि तुम दिल्ली में रहकर ही काम करो तो दीपक भी मेरी बात मान गया। पापा के देहांत के बाद घर की जिम्मेदारी मेरे ऊपर ही थी और मैं घर की जिम्मेदारियों को बखूबी निभा पा रहा हूं।

मैं चाहता था दीपक हमारे साथ ही रहे दीपक ने भी मेरी बात मान ली और वह हम लोगों के साथ दिल्ली में ही रहने लगा। कुछ समय तक तो दीपक ने नौकरी नहीं की लेकिन जब दीपक की नौकरी लग गई तो वह भी काफी खुश था और हम लोग भी इस बात से बहुत ज्यादा खुश थे कि दीपक अब दिल्ली में रहकर ही नौकरी कर रहा है। मां भी हमेशा ही मुझे कहती की बेटा तुम शादी कर लो लेकिन मैं शादी के लिए तैयार नहीं था। एक दिन मां ने मुझसे कहा कि शुभम बेटा मैं चाहती हूं कि तुम अब शादी कर लो। मैंने मां से कहा मां मैं अभी शादी के लिए तैयार नहीं हूं। मां ने मुझे कहा मैं चाहती हूं तुम अब शादी कर लो। मैं भी मां की बात मान गया और मैंने पहली बार मनीषा से मुलाकात कि तो मुझे मनीषा काफी अच्छी लगी। उसे मुझे समझने में काफी समय लगा क्योंकि हम दोनों की ना तो फोन पर बातें होती थी और ना ही हम दोनों एक दूसरे को मिल पाते थे।

मनीषा बहुत ही शर्मीले किस्म की है लेकिन जब हम दोनों की सगाई हो गई तो उसके बाद हम दोनों एक दूसरे को मिलने लगे थे। हम दोनों जब एक दूसरे को मिलने लगे तो मुझे भी काफी अच्छा लगने लगा और मैं मनीषा के साथ बहुत खुश हूं। हमारी शादी का दिन तय हो चुका था जब हम दोनों की शादी हुई तो उसके बाद हम दोनों की शादीशुदा जिंदगी बड़े ही अच्छे से चलने लगी। मनीषा घर की देखभाल अच्छे से करती और घर में सब कुछ अच्छे से चल रहा था। मैं भी इस बात से बहुत ज्यादा खुश था कि घर में सब कुछ ठीक से चल रहा है। एक दिन जब मैं अपने ऑफिस से घर लौटा तो उस दिन दीपक से मैंने पूछा दीपक तुम ऑफिस से कब आए। दीपक ने कहा भैया मैं तो दोपहर मे ही आ गया था। मैंने दीपक से कहा सब कुछ ठीक तो है ना। दीपक ने मुझे कहा हां भैया सब कुछ ठीक है मुझे आज कुछ ठीक नहीं लग रहा था मैंने सोचा कि आज दोपहर में ही घर चला जाऊं इसलिए मैं घर चला आया। दीपक ने उस दिन मुझसे आयुषी का जिक्र किया।

आयुषी जो दीपक के ऑफिस में काम करती है उसने मुझे बताया वह आयुषी से बहुत प्यार करता है लेकिन उन दोनों मे किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया था। दीपक ने पहली बार मुझसे इतनी खुलकर बातें की थी लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि दीपक अब मुझसे हर एक बात शेयर करने लगा था। मैंने दीपक को कहा कोई बात नहीं सब ठीक हो जाएगा। उस दिन दीपक का मूड ठीक नहीं था और मैंने भी सोचा क्यों ना आज हम सब लोग बाहर ही डिनर करने के लिए जाए। मैंने मनीषा से कहा आज हम लोग डिनर करने के लिए चलते हैं। मनीषा भी मान गई और हम लोग बाहर डिनर करने के लिए चले गए  जब हम लोग बाहर गए तो हम लोगों को काफी अच्छा लगा और हम लोग बहुत ज्यादा खुश थे। मुझे अपने परिवार के साथ समय बिताना बहुत ही अच्छा लगा और अगले दिन भी मेरी छुट्टी थी। मैं घर पर ही था उस दिन भी मैंने मनीषा के साथ काफी अच्छा समय बिताया और मनीषा भी बहुत खुश थी।

मनीषा और मैं एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और मनीषा मुझे बहुत ही अच्छे से समझती है। मुझे इस बात की बड़ी खुशी है कि मनीषा और मेरे बीच बहुत ज्यादा प्यार है। जिस तरीके से वह मुझे समझती है वह मेरे लिए बहुत ही अच्छा है क्योंकि हम दोनों के बीच में कभी भी किसी बात को लेकर कोई झगड़े नहीं होते हैं। मेरे और मनीषा के बीच सब कुछ अच्छे से चल रहा है और मैं बहुत ही ज्यादा खुश हूं। मुझे अपने काम के लिए बेंगलुरु जाना था तो उस दिन मैं अपने ऑफिस से घर लौटा और मैंने मनीषा को इस बारे में बताया कि मैं कुछ दिनों के लिए बेंगलुरु जा रहा हूं। मनीषा ने मुझे कहा आप वहां से वापस कब लौटेंगे? मैंने मनीषा से कहा मैं वहां से एक हफ्ते में वापस लौट आऊंगा। मनीषा ने मेरा सामान पैक करने में मेरी मदद की। हम दोनों जब एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो मां कमरे मे आई और बोली बेटा तुम खाना खा लो। अब हम लोगों ने खाना खाया और फिर उसके बाद मैं और मनीषा रूम में आ गए।

मनीषा भी मुझसे बात करने लगी और कहने लगी आप क्या अपनी किसी जरूरी काम से जा रहे है। मैंने मनीषा को बताया हां ऑफिस का कोई जरूरी काम है इसलिए मुझे कुछ दिनों के लिए बेंगलुरु जाना पड़ेगा। मनीषा मुझे कहने लगी काफी दिन हो गए हैं मैं पापा मम्मी से भी नहीं मिली हूं सोच रही हूं उन लोगों से मिल लूं। मैंने मनीषा से कहा ठीक है तुम पापा मम्मी से मिल लो। मनीषा उसके अगले दिन पापा मम्मी को मिलने के लिए जाने वाली थी क्योंकि मुझे भी बेंगलुरु जाना था इसलिए मैंने मनीषा से कहा तुम पापा मम्मी से मिल आओ। मनीषा ने मेरा हाथ पकड़ लिया और मैंने भी मनीषा का हाथ पकड़ लिया था। जब हम दोनों एक दूसरे की तरफ देख रहे थे तो मुझे मनीषा की आंखों में अपने लिए प्यार नजर आ रहा था। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया था।

जब मैंने मनीषा को अपनी बाहों में भर लिया था तो वह मेरे लिए तड़प रही थी और मैं भी बहुत ज्यादा तडप रहा था। हम दोनों की तडप इतनी अधिक बढने लगी थी मैंने जैसे ही उसके होठों से अपने होठों को टकराना शुरू किया तो उसकी गर्मी बढ़ती ही जा रही थी और वह गर्म हो गई थी। मैंने जब मनीषा के सामने अपने लंड को किया तो वह मेरे लंड को बड़े ही अच्छे तरीके से चूसने लगी और उसने मेरे लंड को तब तक चूसा जब तक मेरे लंड से पानी बाहर नहीं आ गया। मैं इतना ज्यादा गर्म हो चुका था मैं रह नहीं पा रहा था, मैं अपने आप पर काबू कर पा रहा था। मैंने मनीषा के कपड़ों को उतारा तो मैंने उसे नंगा कर दिया। जब वह नग्न अवस्था में थी तो मैं उसके बदन को महसूस करने लगा और उसके बदन को महसूस कर के मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था। हम दोनों बहुत ज्यादा उत्तेजित हो रहे थे। मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू कर दिया था मैं उसके स्तनों को बडे ही अच्छी तरीके से चूस रहा था उस दिन मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मैं उसके स्तनों को चूस रहा था। जब मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ को लगाया तो उसकी चूत चिकनी हो गई थी। उसकी चूत से निकलता हुआ पानी बहुत ज्यादा बढ़ चुका था वह कहने लगी तुम मेरी चूत को चाटते रहो।

मैंने उसकी चूत को बहुत देर तक चाटा उसकी योनि पर एक भी बाल नहीं था और मैं उसकी योनि को बहुत ही अच्छे से चाट रहा था मैंने उसकी चूत को तब तक चाटा जब तक उसकी चूत से पानी बाहर नहीं निकल गया था वह बहुत ज्यादा गर्म हो गई थी। मैंने उसकी योनि पर अपने लंड को लगाकर उसकी चूत के अंदर डालाना शुरु किया। मेरा मोटा लंड उसकी योनि के अंदर जा चुका था और जब मेरा लंड उसकी चूत में प्रवेश हुआ तो मुझे मजा आया। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है मै उसकी चूत में अपने लंड को डाले जा रहा था और मेरा लंड उसकी योनि में अंदर बाहर होता तो वह बहुत जोर से चिल्ला कर मुझे कहती मुझे और तेजी से चोदते जाओ। मैंने उसके दोनों पैरों को कस कर पकड़ लिया था जिसके बाद वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है जब हम दोनों एक दूसरे के साथ में सेक्स कर रहे थे तो हम दोनों को ही मजा आ रहा था। मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के मार रहा था और मैं उसे जिस तेज गति से धक्के मार रहा था उससे वह गर्म सिसकारियां ले रही थी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है। मैंने उसे अब घोड़ी बना लिया था घोडी बनाने के बाद जब मैंने मनीषा की चूत को देखा तो उसकी योनि से खून बहार निकल रहा था वह जोर से सिसकारियां ले रही थी। उसकी सिसकारियां बढ रही थी उसकी चूत के अंदर तक मेरा लंड घुसा हुआ था। वह मुझसे अपनी चूतडो को टकराए जा रही थी और मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था जब मैं उसे चोदता। वह मेरा साथ अच्छे से देती हम दोनों ने एक दूसरे का साथ काफी अच्छे से दिया।

जब मुझे महसूस होने लगा मेरा वीर्य गिरने वाला है तो मैंने अपनी माल को मनीषा की चूत में गिरा दिया। मनीषा की चूत मेरे माल से भर चुकी थी और मेरी इच्छा पूरी हो चुकी थी। मुझे बहुत ही मजा आया जिस तरीके से मैंने मनीषा के साथ  शारीरिक सुख का मजा लिया। उसकी चूत का मजा मैंने काफी देर तक लिया वह बड़ी खुश थी जिस तरीके से मैंने उसके साथ में सेक्स संबंध बनाए थे और उसकी इच्छा को पूरा किया था। मनीषा मेरे मोटे लंड को दोबारा से चूसने लगी और उसने मेरे लंड को दोबारा से खड़ा कर दिया था जिसके बाद मैंने उसे कहा तुम मेरे ऊपर से आ जाओ और वह मेरे लंड के अपने ऊपर नीचे अपनी चूतडो को कर रही थी। वह अपनी इच्छाओं को पूरा कर रही थी और अपनी चूतडो को ऊपर नीचे करती तो मुझे मजा आता। मैंने उसे बहुत देर तक तक चोदा तब तक जाकर मेरी इच्छा पूरी हुई है लेकिन मुझे बहुत ही मजा आया जिस तरीके से मैंने और मनीषा ने एक दूसरे का साथ दिया।

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