दिव्या ने मेरा साथ देना शुरू कर दिया

Antarvasna, kamukta: प्रियम और मैं जब उस दिन एक दूसरे को मिले तो मैं प्रियम से मिलकर काफी खुश था। प्रियम मुझे काफी बरसों बाद मिला वह मेरा बचपन का दोस्त है और अब वह मुंबई में रहता है। प्रियम ने मुझे कहा कि तुमने बहुत ही अच्छा किया जो तुम मुंबई आ गए। मैं जयपुर का रहने वाला हूं और मुंबई में मैं नौकरी की तलाश में आया था प्रियम ने हीं मुझे अपने पास बुलाया था और मैं प्रियम के साथ रहने लगा। प्रियम एक अच्छी कंपनी में जॉब करता है और उसने मेरी भी जॉब अपनी कंपनी में लगवा दी। जयपुर में मैं पापा के साथ उनके बिजनेस में हाथ बढ़ाया करता था लेकिन उनका बिजनेस में नुकसान हो जाने के बाद मुझे भी लगने लगा कि मुझे कुछ करना चाहिए जिसके बाद मैंने नौकरी करने का फैसला किया। मैंने जब यह बात प्रियम से कहीं तो प्रियम ने मेरी मदद की और उसने मुझे अपनी ही कंपनी में जॉब पर लगवा दिया। मैं काफी ज्यादा खुश था कि प्रियम ने मुझे अपनी कंपनी में जॉब लगवा दी है और मेरी जिंदगी में अब सब कुछ ठीक हो गया था।

मेरी जॉब को 6 महीने से ऊपर हो चुके थे और मैं चाहता था कि मैं कुछ दिनों के लिए अपने घर हो आऊं। मैंने कुछ समय के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी लेने के बाद मैं घर चला गया। मैं जब अपने घर जयपुर गया तो पापा काफी ज्यादा खुश थे उन्होंने कहा कि शोभित बेटा तुम्हारी नौकरी कैसी चल रही है तो मैंने उन्हें कहा कि पापा मेरी जॉब तो अच्छी चल रही है और मैं काफी खुश भी हूं। पापा ने मुझे कहा कि बेटा तुम ऐसे ही पूरी मेहनत के साथ काम करते रहो। घर पर कुछ दिनों तक रहने के बाद मैं वापस मुंबई लौट आया जब मैं मुंबई लौट आया तो एक दिन मुझे मेरी मां का फोन आया और उन्होंने मुझे बताया कि मेरी बहन सरिता के लिए रिश्ते आने लगे हैं। मैंने मां से कहा कि मां लेकिन क्या सरिता शादी के लिए तैयार है तो मां कहने लगी कि बेटा अब सरिता की उम्र हो चुकी है हम लोग सरिता के लिए लड़का ढूंढ रहे थे और उसके लिए अब काफी रिश्ते भी आने लगे हैं इसलिए हम लोग चाहते हैं कि हम लोग सरिता की शादी करवा दे।

मैंने मां से कहा कि मां तुम कोई अच्छा सा लड़का देखकर सरिता का रिश्ता तय कर दो जिससे कि सरिता की शादी एक अच्छे घर मे हो जाए। पापा और मम्मी ने सरिता के लिए एक अच्छा लड़का देख लिया था और जल्द ही सरिता की सगाई हो गई। जब उसकी सगाई हुई तो मैं भी कुछ दिनों के लिए जयपुर गया था सगाई हो जाने के बाद सरिता की शादी का दिन भी तय कर दिया गया। हम चाहते थे कि सरिता की शादी में कोई भी कमी ना रह जाए इसलिए मैंने अपनी कुछ सेविंग की हुई थी उसमें से ही मैंने पैसे पापा को दे दिए और फिर सरिता की शादी बड़े ही धूमधाम से हुई। सरिता की शादी हो जाने के बाद मैं काफी ज्यादा खुश हो गया था पापा और मम्मी भी बहुत ज्यादा खुश थे। सरिता अपने ससुराल जा चुकी थी कुछ दिनों तक मैं घर पर ही था और जब मैं मुंबई लौट रहा था तो उस दिन ट्रेन में मेरी मुलाकात दिव्या से हुई। दिव्या मेरे बिल्कुल सामने वाली सीट में बैठी हुई थी और वह भी मुंबई में ही जॉब करती है। हम दोनों की काफी अच्छी बनने लगी थी और मुझे तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगा कि हम लोग जैसे पहली बार ही मिल रहे हो, मुझे काफी अच्छा लग रहा था जब मैं दिव्या से बात कर रहा था।

हम लोग मुंबई पहुंच चुके थे और दिव्या ने मुझे अपना नंबर भी दे दिया था यह पहली बार ही था जब हम लोग एक दूसरे को मिले थे। दिव्या ने मुझे अपना नंबर दे दिया था तो मैं काफी ज्यादा खुश था और दिव्या भी बहुत ज्यादा खुश थी, दिव्या मेरी जिंदगी में आ चुकी थी। उसके बाद हम लोग एक दूसरे को डेट करने लगे थे मैं दिव्या के साथ बहुत ही ज्यादा खुश था और दिव्या भी मेरे साथ काफी खुश थी। हम दोनों एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताया करते। दिव्या का ऑफिस मेरे ऑफिस से थोड़ी ही दूरी पर था इसलिए हम लोग हमेशा ऑफिस से फ्री हो जाने के बाद एक दूसरे से मुलाकात किया करते जिससे कि मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लगता था और दिव्या को भी बहुत अच्छा लगता।

एक दिन हम दोनों मेरे ऑफिस के बाहर एक रेस्टोरेंट में बैठे हुए थे वहां पर हम दोनों साथ में बैठे हुए थे और एक दूसरे से बातें कर रहे थे तो दिव्या ने मुझे कहा कि शोभित मैं सोच रही हूं कि कुछ दिनों के लिए जयपुर चली जाऊं। मैंने दिव्या को कहा कि दिव्या लेकिन तुम जयपुर क्यों जा रही हो तो दिव्या मुझे कहने लगी कि ऐसे ही मुझे पापा मम्मी की याद आ रही थी तो सोच रही थी कि कुछ दिनों के लिए मैं जयपुर हो आऊं। मैंने दिव्या से कहा कि अगर ऐसा है तो तुम जयपुर चली जाओ दिव्या ने मुझे कहा कि क्या तुम भी सूरज चलोगे। मैंने दिव्या को कहा कि मुझे उसके लिए ऑफिस से छुट्टी लेनी पड़ेगी, अगर मुझे ऑफिस से छुट्टी मिल जाती है तो मैं भी तुम्हारे साथ जयपुर चलूंगा। हम दोनों ने अब जयपुर जाने के बारे में सोच लिया था और मुझे भी मेरे ऑफिस से छुट्टी मिल चुकी थी इसलिए मैं भी कुछ दिनों के लिए जयपुर चला गया। जब मैं जयपुर गया तो मैं काफी ज्यादा खुश था कि अपनी फैमिली से काफी समय बाद मैं मिल पा रहा हूं और घर में भी सब लोग खुश थे। मेरी बहन भी घर आई हुई थी और कुछ समय तक वह घर पर रही उसके बाद वह अपने ससुराल चली गई।

मैं दिव्या को हर रोज मिला करता था हम दोनों कुछ दिनों तक जयपुर में रहे और उसके बाद हम लोग मुंबई लौट आए। जब हम लोग मुंबई लौटे तो हम दोनों एक दूसरे को हर रोज मिलते रहते। दिव्या मुझसे मिलने के लिए मेरे घर पर आ जाया करती थी। उस दिन मैंने जब दिव्या को घर पर बुलाया तो दिव्या घर पर आ गई हम दोनों एक दूसरे के साथ बैठे हुए थे। अब मैंने दिव्या के हाथों को पकड़कर उसके हाथों को सहलाना शुरु किया तो दिव्या को अच्छा लगने लगा था। दिव्या मुझे कहने लगी मुझे बहुत डर लग रहा है। मैंने दिव्या को कहा कुछ नहीं होगा। दिव्या मुझे कहने लगी मैं तुम पर भरोसा करती हूं मैंने दिव्या को कहा मुझे मालूम है। तुम मुझ पर बहुत ज्यादा भरोसा करती हो। जब मैंने दिव्या के होठों को चूम कर उस से खून निकाल दिया तो दिव्या अब इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई कि वह बिल्कुल भी अपने आपको रोक ना सकी और मुझे कहने लगी मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। मैंने दिव्या से कहा अब रहा तो मुझसे भी नहीं जा रहा है।

मैंने दिव्या के कपड़ों को उतारकर दिव्या के बदन को महसूस करना शुरू कर दिया। जब मै उसके बदन को महसूस कर रहा था तो मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था और दिव्या को भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। हम दोनों के अंदर की गर्मी इस कदर बढ़ने लगी कि मैंने दिव्या की चूत के अंदर अपनी उंगली डालने की कोशिश की लेकिन उसकी चूत में मेरी उंगली नहीं गई। अब मैंने अपने लंड को बाहर निकाला दिव्या ने उसे अपने हाथ में लेते हुए काफी देर तक हिलाया। दिव्या मेरे लंड को हिलाने के बाद जब उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर उसे चूसना शुरू किया तो उसे काफी ज्यादा अच्छा लगने लगा और मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आने लगा था। मैंने दिव्या से कहा मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा है और बहुत ज्यादा मजा आ रहा है। अब हम दोनों एक दूसरे के साथ पूरी तरीके से गर्म होने लगे थे। मैंने दिव्या को कहा मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है अब दिव्या ने मेरा साथ देना शुरू कर दिया और मुझे कहा मेरी चूत के अंदर लंड घुसा दो।

मैने उसकी योनि पर अपने लंड को लगाकर धीरे धीरे अंदर की तरफ डालना शुरू किया जैसे ही मेरा मोटा लंड दिव्या की योनि के अंदर घुसा तो मैंने दिव्या को कहा मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है। मैंने जब दिव्या की योनि के अंदर से निकलते हुए खून को देखा तो मैं बहुत ज्यादा खुश था दिव्या की सील पैक चूत देखकर मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गया था। मैंने दिव्या से कहा मुझे अब तुम्हें चोदने मे बहुत ज्यादा मजा आ रहा है। दिव्या मुझे कहने लगी मुझे भी तुम्हारे साथ सेक्स करने मे बहुत अच्छा लग रहा है। मैंने दिव्या के साथ सेक्स का मजा लिया और दिव्या के साथ काफी देर तक सेक्स किया। दिव्या को अब इतना ज्यादा मजा आने लगा था कि मैंने दिव्या की चूत में निकलते हुई आग को बढा कर रख दिया था। मैंने दिव्या की चूत से निकलती हुई आग को इतना ज्यादा बढ़ा कर रख दिया था। उसने मुझे अपने पैरों के बीच में जकडकर अपने अंदर की गर्मी को पूरी तरीके से बढ़ा दिया। मैंने जब दिव्या से कहा मुझे तुम्हारी चूत मे अपने माल को गिराना है तो दिव्या ने कहा अब तो सब कुछ हो चुका है मैं तुम्हारी हो चुकी हूं। दिव्या और मैं एक दूसरे की बाहों में थे मेरा माल दिव्या की चूत मे जा चुका था। दिव्या बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी जब उसकी योनि के अंदर मैंने अपने माल को गिराया और अपनी इच्छा को पूरा कर लिया।

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